Mere Dil Se Mere Dil Ka Haal | Jyoti Sharma | The Social House Poetry | Whatashort




Comments
  1. अगर तुम हसीन हो
    तो में भी जवान हूं

    अगर तुम मुहब्बत का समन्दर हो
    तो में भी ख्वाइशों का रेगिस्तान

    अगर तुम जवानी हो
    तो में उस जवानी की कहानी

    अगर तुम किसी की ज़िन्दगी हो
    तो मेरे लिए जीने का मकसद

    अगर तुम किसी का ख़्वाब हो या फिर बहुत खूबसूरत ख्वाब
    तो मेरे लिए मेरी हकीकत हो या फिर वो हक़ीक़त जिसे लोग खूबसूरत ख्वाब कहते है

    अगर तुम अपने आप को आईने में देखती हो
    तो में तुम्हे अपने आप में देखता हूं

    अगर तुम किसी और को प्यार करोगी
    तो में उस से नफ़रत करुगा

    अगर तुम मेरे साथ रहोगी
    तो में वक्त को रोक दुगा

    तुम कहीं जाना चाहोगी
    तो भी में वक्त को रोक लुगा

    तुम कुछ कहना चाहोगी
    तो भी में वक्त को रोक लुगा

    अगर तुम दिल से रुकना चाहो हमेशा के लिए
    तो शायद मुझे वक्त को रोकने की जरूरत ना पड़े

    अगर तुम हसीन हो
    तो में भी जवान हूं

  2. पहली दफा देखते ही पाने को जी चाहता था,खुश तो मैं बहुत था ही मगर उनका साथ चाहता था।
    बातों का जो सिलसिला उन्होंने हमसे शुरू किया,हम तो दिल दे बैठे उनके अंदाज़ पर।
    हमें तो चाय ना पसंद थी मगर उन्हें दिल्लगी थी,हमने जो दी लाकर उन्हें उनकी वो मुस्कराहट हमें पसंद थी।
    सिलसिला ये चाहता का यूहीं बढ़ता चला गया,उनका मुस्कुराना और शर्माना दिल में बस गया।
    बातें तो बहुत होती थी बिना सवालों के,शायद कोशिश दोनों की थी अपना बनाने की।
    नाराज़ होकर भी न जाने क्यों मान जाया करती थी,कभी बुरा कहा ही नहीं हमसे शायद पास लाना चाहती थी।
    दोस्ती जो गहरी होती गयी और बढ़ गयीं मुलाकातें भी,समय भी भागता सा लगता था और लगता था अभी सिर्फ एक पल हुआ।
    वो चीज़ें हमें पसंद आने लगी जो उन्हें पसंद थी,न जाने क्यों हम इतने बदल गए शायद उनसे दिल्लगी थी।
    वो हसीं पल अब छूट गए मेरी नादानियों से,सोचती होगी क्या मेरे बारे में और क्या कहती होगी दिल से।
    मैं माफ़ी मांगता था और कहा मिलने के लिए,पर अब दूर हो गए एक अरसे के लिये।
    पर वो पल इतने कमज़ोर न थे जो वो हमेशा के लिए दूर हो जाएं,एक दिन पुछा उन्होंने और बताओ कैसे हो।
    वो ख़ुशी उस ख़ुशी से ज्यादा थी,जब हम उनसे पहली बार मिले थे।
    आज भी हम उनकी यादों में रहते हैं उन्ही पलों को जीते हैं और उन्हीं पलों पर कहते है–तुमसे प्यार करना हमारी सबसे खुशनसीब गलती थी और ना जाने क्यों वो पल आज तक जिन्दा हैं।
    वैभव दिवेदी

  3. वो जो रेत पे आपके क़दमों के निशान है ना
    थोड़ा गौर से देखना मेरे दबे अरमान मिलेंगे।®
    – सौरभ

  4. Zindagi main khushiya zyaada nhi thi, Jo khushi mujhe deti thi wo usko guzara nhi thi, sochta tha kai baar main upper dekhkar "tu hai na.

    Chahat meri adhuri reh gyi jo khaani mene Shuru ki thi,wo reh gyi adhuri. zayada nhi maanga tha mene us se bus kuch pal ka saath hi chaha tha. Wo bhi use zalim ko gawara na tha.

    Log kehte the mujhe kismat tere sath hai main log ko kehta tha ye bas kehne ki baat hai.

    Phir ek samay essa aaya upper waale ne apna roop dikhlaya chahat meri kitni choti thi ye mene tab mene jaana jab meri zindagi mein aayi Meri jaanejaana.

    Dekhti thi wo hume kuch iss trh apni nigaaho se
    Dekha na kabhi humne hume apni nigaaho se.
    Humari chahat kuch or thi per uski chahat kuch or thi, logo ki khi baatein mujhe sach lagne lagi thi.
    Meri jo chahat thi ab wo puri ho rhi thi

    Khwaabo main dekhi batain Ab hakikat ban chuki thi. Lag rha tha essa meri zindagi ab tham chuki thi.

    Ab koi Gila shikwa nhi us se na hi koi khwaish hai
    KyKyoki ab mujhe yakin hai k "tu hai na"

    Plz btaaye kaisi hai mene likhi hai

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